CY न्यूज़

Monday, 17 January 2022

सर्वधर्म प्रार्थना में संघमाता डा.मुक्ति भटनागर को दी गई श्रद्धांजलि।

सुभारती विश्वविद्यालय की संस्थापिका संघमाता डा.मुक्ति भटनागर की 65 वी जयंती पर विश्वविद्यालय परिसर में बोधि उपवन का किया गया उद्घाटन। दो सत्रों में आयोजित हुआ कार्यक्रम। 

शाम 6:30 बजे संघमाता डा.मुक्ति भटनागर की याद में विश्व शान्ति हेतु कंडील उडाएं गये।

मेरठ 16 जनवरी (CY न्यूज) संघमाता डा.मुक्ति ग्लोबल बुद्धिस्ट फाउण्डेशन एवं सुभारती ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में सुभारती विश्वविद्यालय की संस्थापिका संघमाता डा.मुक्ति भटनागर की 65 वी जयंती पर सरदार पटेल प्रेक्षागृह में सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन हुआ। जिसमें सभी धर्मों के गुरूओं ने भाग लिया। कार्यक्रम कोरोना की समस्त सावधानियों पर अमल करते हुए सीमित संख्या में लोगो की उपस्थिति में किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि, कुशीनगर के भिक्षु संघ अध्यक्ष भदंत ए.बी ज्ञानेश्वर, अंतराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ नई दिल्ली के महासचिव डा.धम्मापिया, जनपद बाग़पत के जमीयत उलेमा हिन्द के नायब सदर मुफ्ती शाह आलम मज़ाहिरी, थापरनगर गुरूद्वारे के मुख्य ग्रन्थि ज्ञानी किशन पाल सिंह, ऑल इंडिया इसाई महासभा के राष्ट्रीय पादरी रेवजो एम होवार्ड, हस्तिनापुर जैन मंदिर के प्रतिष्ठाचार्य पंडित प्रमोद जैन शास़्त्री, सुभारती पंचायती मंदिर के मुख्य पंडित शंक्लानंद, अंतराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान लखनऊ के भूतपूर्व अध्यक्ष डा.नन्द रतन थेरो, ऑल इंडिया उर्दू तन्जीम के सचिव हाजी आजाद सैफी, धम्मा मदर मेजोरी चारोन ने संघमाता डा.मुक्ति भटनागर के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

सुभारती परिवार की ओर से सभी धर्म गुरूओं को पौधा देकर अभिनंदन किया गया।

स्वागत भाषण में सुभारती विश्वविद्यालय के संस्थापक डा.अतुल कृष्ण बौद्ध ने सर्वधर्म प्रार्थना में आए सभी धर्मों के गुरूओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पंचशील का सिद्धांत किसी पंथ का अंश नही है, यह तो सार्वभौमिक और मानव को एकता के सूत्र में पिरोने का मार्ग है जो हर धर्म की मान्यता के विभिन्न प्रारूप में शामिल है। उन्होंने कहा कि आज के दिन सुभारती विश्वविद्यालय की संस्थापिका संघमाता डा.मुक्ति भटनागर का जन्म दिवस है जो पंचशील के सिद्धांत का अनुसरण करते हुए प्रेम, करूणा मैत्री के भाव से सुभारती ग्रुप द्वारा मनाया जा रहा है। सुभारती अस्पताल के चिकित्सा उपाधीक्षक डा.कृष्णा मूर्ति ने संघमाता डा.मुक्ति भटनागर के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण यादों को सभी के समक्ष रखा। उन्होंने मॉ की ममता पर आधारित गीत सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया। सर्वधर्म प्रार्थना में पंचशील का सिद्धांत किसी पंथ का अंश नही है, यह शाश्वत है और सार्वभौमिक दर्शन है‘‘ के विषय पर सभी धर्मां के गुरूओं ने अपने विचार रखें। अंतराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ नई दिल्ली के महासचिव डा.धम्मापिया ने कहा कि बौद्ध धर्म वैज्ञानिक विचारों पर मानव को संगठित करने का मार्ग हैं। उन्होंने कहा कि संघमाता डा.मुक्ति भटनागर ने बौद्ध दर्शन को अपने विस्तृत अनुभव से सर्व समाज के हित में प्रचारित किया है और सुभारती के रूप में समाज को विकसित करने का पूरे विश्व को संदेश दिया है। उन्होंने बौद्ध रीति रिवाजों से संघमाता डा.मुक्ति भटनागर को श्रद्धांजलि अर्पित की। जनपद बाग़पत के जमीयत उलेमा हिन्द के नायब सदर मुफ्ती शाह आलम मज़ाहिरी ने कुरान की तिलावत करते हुए सभी को इंसानियत का पैग़ाम दिया। उन्होंने कहा कि संघमाता डा.मुक्ति भटनागर की विचारधारा समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर देश उत्थान में कार्य करने वाली रही है। उन्होंने कहा कि संघमाता डा.मुक्ति भटनागर के विचारों को पल्लवित करने के लिये मुस्लिम समाज हर तरह से सुभारती परिवार के साथ है ताकि राष्ट्र निमार्ण हेतु सभी वर्ग एवं धर्म एकता के साथ मानव हित में एक साथ कार्य कर सकें। मुख्य अतिथि कुशीनगर के भिक्षु संघ अध्यक्ष भदंत ए.बी ज्ञानेश्वर ने कहा कि तथागत बुद्ध का जीवन कथन और शिक्षाएं इंसान को दुखों से मुक्ति दिलाने, ज्ञान और सही मार्ग पर चलने के लिए आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी की उस समय हुआ करती थी। उन्होंने कहा कि तथागत बुद्ध ने अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए लोगो को जीवन जीने की सही दिशा बताई और कल्पना आधारित विश्वास का विरोध करते हुए कर्म को इंसान की प्रगति का सही रास्ता बताया। उन्होंने बौद्ध रिवाज के अनुसार मंत्रोचारण करते हुए संघमाता डा.मुक्ति भटनागर को श्रद्धा सुमन अर्पित किया। इसी तरह थापरनगर गुरूद्वारे के मुख्य ग्रन्थि ज्ञानी किशन पाल सिंह, ऑल इंडिया इसाई महासभा के राष्ट्रीय पादरी रेवजोए एम होवार्ड, हस्तिनापुर जैन मंदिर के प्रतिष्ठाचार्य पंडित प्रमोद जैन शास़्त्री, सुभारती पंचायती मंदिर के मुख्य पंडित शंक्लानंद, अंतराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान लखनऊ के भूतपूर्व अध्यक्ष डा.नन्द रतन थेरो, धम्मा मदर मेजोरी चारोन एवं पूर्व राज्य मंत्री किरण जाटव ने संघमाता को अपने धर्मों एवं रीति रिवाज के अनुसार नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा.शल्या राज ने सर्वधर्म प्रार्थना में आए सभी धर्म गुरुओं को धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में बौद्ध विद्वानों द्वारा संघमाता की स्मृति में बोधि उपवन का उद्घाटन किया गया। बोधि उपवन में तथागत बुद्ध की भव्य मूर्ति स्थापित की गई। साथ ही बोधी उपवन में बौद्ध मठ, अशोक स्तम्भ, धर्मचक्र, माने, दीपशाला एवं बौद्ध कुण्ड में मछलियों को छोड़कर विधिवत उद्घाटन किया गया। प्राचीन बोधिवृक्ष के नीचे बौद्ध धर्म की सभी पद्धतियों द्वारा विधिवत पूजा अर्चना करके संघमाता डा.मुक्ति भटनागर को बोधि उपवन समर्पित किया गया। शाम 6:30 बजे संघमाता डा.मुक्ति भटनागर की याद में विश्व शान्ति हेतु कंडील उडाएं गये। सुभारती ट्रस्ट के अध्यक्ष डा.हिरो हितो ने बताया कि संघमाता डा.मुक्ति भटनागर की स्मृति में 09 जनवरी से लेकर 17 जनवरी तक संघमाता डा.मुक्ति भटनागर का सप्ताह मनाया जा रहा है। जिसमें विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से संघमाता को श्रद्धांजलि दी जा रही है। मंच का संचालन प्रीति सिंह ने किया। कार्यक्रम में सभी अतिथि द्वारा फाईन आर्ट की पत्रिका डा.मुक्ति भटनागर मेमोरियल आर्ट प्रदर्शनी का विमोचन किया गया जिसमें संघमाता द्वारा बनाएं गए चित्रों को संग्रहित किया गया है। इस अवसर पर उमालोक के न्यासी डा.आलोक भटनागर, लोकप्रिय अस्पताल के निदेशक डा.रोहित रविन्द्र, सुभारती विश्वविद्यालय की सी.ई.ओ डा.शल्या राज, सुभारती अस्पताल के चिकित्सा उपाधीक्षक डा.कृष्णा मूर्ति, डा.आकांक्षा सिंह, अवनी कमल, कुलपति डा.जी.के थपलियाल, चेयरमैन क्यूसी डा.एन.के आहूजा, प्रतिकुलपति डा.अभय शंकर गौड़ा, डा.एस.डी खान, अतिरिक्त कुलसचिव सैयद ज़फ़र हुसैन, डा.पिंटू मिश्रा, डा.नीरज कर्ण सिंह, डा.वैभव गोयल भारतीय, डा.संदीप कुमार, डा.महावीर सिंह भंते, डा.चन्द्रकीर्ति, डा.मनोज कपिल, डा.विवेक कुमार, डा.सोकिन्द्र कुमार, विवेक तिवारी, विशाल सिंह, सुभाष प्रधान, दिनेश कुमार, सरदार हरप्रीत मान, हर्षवर्धन कौशिक, राजकुमार सागर, संजीव कुमार, ए.सी पाठक, आनन्द पाल, नरेश कुमार, डा.जासमीन आदि सहित आयोजन समिति के सभी सदस्य उपस्थित रहे।

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