रक्षाबंधन पर्व पर देखने को मिला हिंदू-मुस्लिम एवं भाई-बहनों का प्यार।
कंचौसी नगर व कस्बा में रक्षाबंधन पर्व को बड़ी ही धूमधाम से मनाया गया।
औरैया/कंचौसी (संवाददाता विपिन गुप्ता) 12 अगस्त (CY न्यूज) भाई और बहन के इस अटूट बंधन रक्षाबंधन का पर्व पूरे देश में बड़ी ही धूमधाम से मनाया गया। जहां पर बहनों ने अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधकर भइया से अपनी जिंदगी भर रक्षा करने का वचन लिया। भाईयों ने भी अपनी बहिनों से राखी बंधवा कर जिंदगी भर रक्षा करने का वचन भी दिया। जनपद औरैया तहसील बिधूना सहार विकासखण्ड क्षेत्र अंतर्गत कंचौसी कस्बा व नगर में कुछ अलग ही नजारा देखने को मिला है। भाई बहन के अटूट स्नेह का पर्व रक्षाबंधन शुक्रवार को हर्षोल्लास से मनाया गया। हर वर्ष की तरह सावन पूर्णिमा पर बहनों ने भाईयों की कलाई पर राखी के रूप में रक्षा सूत्र बांधकर दीर्घायु की कामना की। परम्परा का निर्वहन करते हुए भाइयों ने बहनों को उपहार भेंटकर जीवनभर रक्षा का संकल्प लिया। रक्षा बंधन को लेकर शहर में भारी उत्साह दिखा। बहन-भाई के प्यार का प्रतीक रक्षाबंधन पर हर घर में उत्साह देखने मिला। भाई कलाई पर प्रेम का सूस बांधने के लिए बहने आतुर दिखाई दी। तो भाइयों खुशी-खुशी राखी बंधवाई। बहनें सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर भाईयों को राखी बांधने पहुंची। भाइयों ने भी बहनों के घर पहुंचने पर स्वागत किया। इससे पहले रक्षा बंधन को लेकर घरों में विशेष तैयारियां की गई थीं। राखी की त्योहार मनाने से पहले परम्परा के अनुसार लोगों स्नान कर पूजा के लिए मंदिर पहुंचे। इसके उपरांत बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत बांधकर जन्म-जन्म तक सुख-दुःख में साथ निभाने का वचन भाईयों से लिया। वहीं भाईयों ने भी बहनों को उपहार देकर हमेशा साथ निभाने का वादा किया। इस दौरान भाइयों ने अपनी बहनों को उपहार भेंट किए। सबसे ज्यादा उत्साह बच्चों में देखने मिला। बच्चियां अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने आतुर दिखी। तो बच्चे भी राखियां बंधवाने के लिए उत्साहित दिखे। रक्षा बंधन पर भद्रा का साया होने पर अधिकांश घरों में शुभ मुहूर्त देखकर रक्षा बंधन का त्योहार मनाया गया। रक्षाबंधन के पर्व को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं। पंडित निर्मल दुबे ने बताया है कि शास्त्रों के मुताबिक राजा बिल ने भगवान विष्णु को चार माह के लिए अपना दरवारी बना लिया था। वचन वश वह राजा पहरा देते थे। भगवान को वचन से मुक्त कराने के लिए माता लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी रक्षा सूत्र बांधा था और भगवान की मुक्त कराने का वचन लिया था। उन्होंने कहा कि राखी का मतबल रक्षा सूत्र है। रक्षा वचन लेने के लिए बहने अपने भाई को, ब्रह्मण अपने यजमानों, क्षत्रिय अपने शस्त्रों और वैश्य अपने संस्थानों में रक्षा सूत्र बांधते हैं। रक्षाबंधन का यही मूल महत्व है।



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