हादसे से चंद मिनट पहले वायरल हुआ एक वीडियो युवकों की अराजकता को बयां कर रहा है। होंडा अमेज में सवार इंचौली के गाव जमालपुर निवासी रजत, सिविल लाइन निवासी अर्जुन, कंकरखेड़ा निवासी वीरेंद्र और दौराला के मटौर निवासी सुरेंद्र एक पार्टी से लौट रहे थे, जबकि उनके अन्य दोस्त ईको स्पोर्ट्स कार में सवार थे। दोनों वाहनों ने दिल्ली हाईवे पर दौड़ लगाई थी। पुलिस की शुरुआती छानबीन में पता चला है कि एक युवक (छात्र) होंडा अमेज के बोनेट पर लेटा था, जबकि एक युवक (छात्र) ईको स्प़ोर्ट्स कार की छत पर बैठा था। पुलिस मान रही है कि दोनों गाड़ियों ने आपस में रेस लगाई। गाड़ी भगाने के चक्कर में आगे चल रही स्कूटी में होंडा कार ने टक्कर मार दी। हादसे में स्कूटी सवार दंपती की मौत हो गई और अनियंत्रित हुई कार पेड़ से टकरा गई और कार चालक अर्जुन और बोनट पर लेटे रजत की भी मौके पर मौत हो गई। अगर कार सवार यातायात के नियमों का उल्लंघन नहीं करते तो चारों की जान बच सकती थी। इन सभी बिंदुओं पर फोरेंसिक टीम जाच कर रही है। बताते चले कि दुर्घटना टोल प्लाजा से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर हुई थी। अगर कार चला रहे युवक ने सीट बेल्ट बांधी होती तो एयर बैग खुल जाते और उसकी जान बच सकती थी।
हाईवे की सुरक्षा राम भरोसे है। स्पीड नापने के लिए पुलिस पर एक स्पीड गन रडार है। दलील दी जा रही है कि पुलिसकर्मियों की कमी के चलते उसका उपयोग नहीं हो पाता है। यही कारण है कि हाईवे पर लगातार ओवर स्पीड में हादसे हो रहे हैं। चेकिंग नहीं होने से भी हाईवे पर वाहन चालक नियमों का मखौल उड़ा रहे हैं। कहने को परतापुर, मोदीपुरम, टोल प्लाजा और सकौती पर चेकिंग प्वाइंट हैं, बावजूद इसके यहां ओवर स्पीड वाहनों को रोका नहीं जाता। हादसे से पहले अगर टोल प्लाजा पर ही हुड़दंगी युवकों को पुलिस रोक देती तो दर्दनाक हादसा नहीं होता, लेकिन पुलिस ने इस पर ध्यान नहीं दिया।

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