Monday, 21 February 2022

सेवा भारती ने मनाई परम पूजनीय संत शिरोमणि रविदास की जयंती।

मेरठ 20 फरवरी (CY न्यूज) सेवा भारती मेरठ महानगर द्वारा रविदास जयंती का पर्व आई.एम.ए हॉल, निकट शर्मा स्मारक, मेरठ पर धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम संत शिरोमणि रविदास एवं भारत माता के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन, पुष्प अर्पण एवं प्रभु वंदना के साथ शुरू किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डा.दिनेश कुमार (प्रो.इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट, चौधरी चरण सिंह विश्विद्यालय, मेरठ) ने की व संचालन छविंद्र सैनी अध्यक्ष सेवा भारती मेरठ महानगर द्वारा किया गया। मुख्य वक्ता ईश्वर दयाल (क्षेत्र प्रमुख धर्मजागरण समानव्य पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मेरठ), मुख्य अतिथि फूल सिंह (प्रान्त कार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, मेरठ प्रान्त), विशिष्ट अतिथि मयंक गुप्ता (डिप्टी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर, लायंस क्लब मेरठ), संजय प्रजापति (सदस्य माटी कला बोर्ड, उ.प्र सरकार), अतिथि कैलाश चंद शर्मा (प्रान्त अध्यक्ष, सेवा भारती मेरठ प्रान्त), व दर्शन लाल अरोड़ा (पूर्व क्षेत्रीय संघचालक) रहे। डा.दिनेश कुमार ने कहा कि निर्गुण भक्ति शाखा के महान कवि एवं संत शिरोमणि (संत रविदास) उन महान पुरुषों में से एक है, जिन्होंने समाज की धारा का रुख मोड़ दिया था। उनके द्वारा गाए दोहों और पदों से आम जनता का उद्धार हुआ। अत्यंत सहृदयी स्वभाव के रैदास को संत कबीर का समकालीन माना जाता है। वो भी कबीर की ही भांति कर्म को ही महत्ता देते थे। ईश्वर दयाल ने कहा कि सन्त रविदास एक महान संत, कवि, समाज सुधारक और भगवान के अनुयायी थे। रविदास निर्गुण सम्प्रदाय के प्रसिद्ध और प्रमुख हस्ती में से एक थे। संत रविदास का मानना था कि ईश्वर की भक्ति का मौका बड़े भाग्य से मिलता है। उसे अभिमान में पड़कर खराब नहीं करना चाहिए। जैसे विशालकाय हाथी चीनी के दानों को नहीं चुन सकता। जबकि छोटी सी चींटी इसे आसानी से चुन लेती है। इसी प्रकार अभिमान से दूर रहकर ही हम ईश्वर की सच्ची भक्ति कर सकते है। उन्होंने कहा कि सेवा भारती के कार्यकर्ताओं का धर्म सेवा है। सेवा भारती का कार्य समाज मे समरस्ता की खुशबू फैलाना है। फूल सिंह ने कहा कि सेवा भारती का कार्य सेवा बस्तियों में है। विभिन्न कारणों से वंचित रह गए वर्ग में स्वाभिमान का संचार कर उन्हें स्वालंबी बनाना है तथा सेवा प्रक्रिया से समाज मे समरस्ता का भाव जागृत करना है। उन्होंने कहा कि रविदास बाल्यकाल से ही काफी प्रतिभाशाली थे। उन्हें प्रारंभ से ही साधु-संतो की संगति अच्छी लगती थी। चूंकि उस समय समाज कई टुकड़ो में बँटा था। लोग कभी धर्म के नाम पर, तो कभी जाति के नाम पर एक-दूसरे का खून बहा दिया करते थे। ऐसे में संत रविदास का जन्म किसी अवतार से कम नहीं था। मयंक गुप्ता ने कहा कि हर सेवा नारायण सेवा है। सन्त रविदास के जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने बतलाया कि एक बार रैदास के कुछ शिष्य गंगा स्नान के लिए जा रहे थे। तो सबने रैदास को भी साथ चलने को कहा। लेकिन रैदास ने मना कर दिया, क्योंकि उन्होंने किसी को समय पर काम पूरा कर के देने का वादा कर दिया था, और वो अपना वादा तोड़ नहीं सकते थे। उन्होंने कहा कि, “गंगा-स्नान के लिए मैं अवश्य चलता किन्तु गंगा स्नान के लिए जाने पर मन यहाँ लगा रहेगा तो पुण्य कैसे प्राप्त होगा? मन जो काम करने के लिए अन्त:करण से तैयार हो वही काम करना उचित है। मन सही है तो इसे कठौते के जल में ही गंगास्नान का पुण्य प्राप्त हो सकता है।” तभी से यह कहावत प्रचलित हो गयी–“मन चंगा तो कठौती में गंगा।” रविदास जयंती के मौके पर मेधावी छात्र खिलाड़ी शिवानी सिंह, आयुषी सिंह, स्वाति, मोनिका जिन्होंने देश स्तर पर  व प्राची जिन्होंने प्रदेश स्तर पर हॉकी खेलकर नाम रोशन किया उन्हें सम्मानित किया। हाई स्कूल में अपने स्कूल में श्रेष्ठ अंक पाने वाले छात्र निखिल पुत्र मनोज कुमार, निखिल पुत्र सुनील कुमार, कु.खुशी, आदित्य लोहरे, विवेकानंद लोहरे, अश्वनी सूद, मनुश्री सूद, कु.विशाखा, कु.प्रेरणा, इंटरमीडिट की छात्रा  कुमारी इंदु, प्रियांशु कुमार, हेमंत कुमार, शिवम काशिया, धनंजय कुमार, कुमारी तान्या, अमन वर्मा को सम्मानित किया। विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले विद्यार्थी अर्जुन, देव, प्रतीक, लक्की चपराना को सम्मानित किया गया। समाज मे उत्कृष्ट कार्य करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता डा.उर्मिला कार्या, अ मित कुमार, प्रदीप चिंयोटी, कु.तान्या, अनुज योगी, बहन बबिता खन्ना को सम्मानित किया गया। वंदे मातरम गीता, डा.मनोज जाटव द्वारा किया गया, कार्यक्रम संयोजक डा.गौरव दत्ता रहे। कार्यक्रम समापन पर सभी को प्रसाद वितरण किया गया। इस मौके पर डा.मनोज जाटव, नरेश वैद, सुंदरलाल भुरांडा, दीपक सूद, सतीश सैलगढ़ी, अशोक अग्रवाल, मुकेश सैनी, विपुल सिंघल, गौरव प्रजापति, अक्षय पटेल, डा.कपिल गर्ग, डा.गौरव दत्ता आदि उपस्थित रहे।

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