जिले के 20 से अधिक गांवों में घरों में लगाए गये पीरियड चार्ट।
‘सेल्फी विद डॉटर’ फाउंडेशन जगा रहा गांव-गांव अलख।
मेरठ 20 जुलाई (CY न्यूज) अब बेटियां माहवारी जैसे विषय पर खुलकर बात करने लगी हैं। घरों में बेटियां अपना पीरियड डेट चार्ट बनाकर लगा रही हैं। ताकि अपनी सेहत के प्रति वह ध्यान रख सकें। माहवारी की सावधानियों और जरूरतों पर अमल कर सकें। जनपद में देहात क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों में यह पीरियड चार्ट घरों में लगाए गए हैं। इन चार्ट पर घर की महिला सदस्यों के नाम के साथ उनकी माहवारी की डेट लिखी जाती है। ताकि हर महीने पीरियड आने से पहले उसे याद आ जाए। गांवों में तत्काल सेनेटरी पैड नहीं मिलते। चार्ट देखकर पहले सेसेनेटरी पैड खरीद सके। पीरियड चार्ट पर महिला का नाम और माहवारी की डेट लिख दी जाती है यह पीरियड आने से पहले का एक अलार्म है। के संस्थापक सुनील जागलान के सहयोग से मेरठ में यह पीरियड चार्ट अभियान चलाया जा रहा है। इस चार्ट पर घर की महिला सदस्यों के नाम लिखे जाते हैं। उसके आगे उनकी माहवारी की तारीख लिखी जाती है। ताकि हर महीने महिलाओं को याद रहे कि उनकी माहवारी कौन सी तारीख को होने वाली है। बालिकाओं को पीरियड संबंधी जरूरतों और सावधानियों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। फाउंडेशन के संस्थापक सुनील जागलान ने बताया जनपद के किठौर, लावड़, खरखौदा, बहसूमा, नंगली ताशी, कुराली, अफजलपुर, महलका, अख्तियारपुर, चरला, हाजीपुर, इटायरा, इख्तियारपुर, जेवरी गांवों में फिलहाल पीरियड चार्ट लगाए गए हैं। अपने पीरियड चार्ट के साथ खड़ी रुकैय्या कहती हैं पीरियड चार्ट होने की वजह से पहले ही पैड की व्यवस्था कर लेती हैं। पीरियड चार्ट को इस्तेमाल करने वाली फरहा किठौर में रहती हैं। फरहा ने कहा, महिलाएं तो पीरियड की तारीख ध्यान रख लेती हैं, मगर लड़कियां लापरवाही के चलते याद नहीं रख पातीं। गांव में इमरजेंसी में सेनेटरी पैड की व्यवस्था करना बहुत मुश्किल होता है। फरहा ने बताया, स्कूल कॉलेज में अचानक माहवारी आ जाए तो दिक्कत होती है लेकिन पीरियड चार्ट लगाने से सबसे बड़ी मदद पैड मैनेजमेंट से हुई है। चार्ट में देखते ही पता चल जाता है कि कब माहवारी आनी है और पैड का इंतजाम कर लेती हैं। पीरियड चार्ट अभियान से जुड़ी फरहा कहती है अब घर के पुरुष से मासिक स्वास्थ्य पर बात करने में पहले जैसे झिझक नहीं लगती।
परिवार में खुलकर बात करने में मदद मिली:
लावड़ की आलिया ने भी घर पर पीरियड चार्ट लगाया है। आलिया कहती हैं पहले घर में पुरुषों के सामने हम कभी पीरियड पर बात नहीं कर पाती थीं। लेकिन पीरियड चार्ट लगाने से काफी मदद मिली है। एक महिला को माहवारी के दौरान जो तकलीफ है, घर के अन्य सदस्यों की जो मदद उसे चाहिए वह सब इस चार्ट के जरिए घर के पुरुष समझ रहे हैं। मेरे भाई भी इस विषय पर अब खुलकर बात करते हैं। सुनील जागलान के सहयोग से मेरठ में बालिकाओं को पीरियड संबंधी जरूरतों और सावधानियों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया देहात क्षेत्र में बालिकाओं को पीरियड संबंधी सबसे ज्यादा परेशानी का करना पड़ता है। पहले वह खुलकर कहने से झिझकती थी। ऐसे में बालिकाओं को पीरियड संबधी जागरूकता लाने के लिये यह अभियान चलाया जा रहा है। इससे बालिकाओं में जागरूकता बढ़ी है।

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