Saturday, 23 July 2022

जिस तरह वकील को बहस करने से नहीं रोका जा सकता है, उसी तरह पत्रकारों को भी लिखने से रोका नहीं जा सकता है: न्यायमूर्ति डी.वाई चंद्रचूड़ सुप्रीम कोर्ट।

प्रदेश समेत कई जनपदों/जिलों एवं जनपद जिला औरैया के साथ-साथ कंचौसी के पत्रकारों ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी.वाई चंद्रचूड़ सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हार्दिक स्वागत किया और उनको सादर धन्यवाद एवं सादर आभार भी ज्ञापित किया।

औरैया/कंचौसी (संवाददाता विपिन गुप्ता) 22 जुलाई (CY न्यूज) पत्रकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर देश के सर्वोच्च न्यायालय न्यायमूर्ति डी.वाई चंद्रचूड़ ने एक अहम फैसले में उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार के अधिवक्ता के पत्रकार द्वारा सरकार के भविष्य में न लिखने के शर्त के साथ जमानत देने का अनुरोध किया था। जिस पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश/न्यायमूर्ति ने पत्रकारों को कुछ कहने या लिखने से नहीं रोकने की व्यवस्था देते हुए कहा है कि यह बिल्कुल वैसा ही होगा कि जैसे हम एक वकील से यह कहें कि आपको बहस नहीं करनी चाहिए। नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट इंडिया संगठन की उत्तर प्रदेश टीम के साथ जनपद/जिला औरैया के साथ-साथ कंचौसी के समस्त पत्रकारों समेत उत्तर प्रदेश के हजारों पत्रकारों ने सुप्रीम कोर्ट के इस सुप्रीम फैसले का स्वागत करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश/न्यायमूर्ति को पूरे देश के पत्रकार संगठन की तरफ से सादर धन्यवाद एवं सादर आभार ज्ञापित किया है। और कहा है कि पत्रकारों को देश व लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। और वह हमेशा देश को मजबूत करने और स्वस्थ समाज की परिकल्पना की आवाज को अपनी कलम की लेखनी से उजागर करने का कार्य करता है। इसलिए उसके स्वस्थ लेखन पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक न लगाकर देश की प्रशासनिक अधिकारियों को एक संदेश दिया है। कंचौसी के दैनिक अमर उजाला प्रतिनिधि कंचौसी सुरेश यादव, दैनिक जागरण प्रतिनिधि कंचौसी प्रफुल्ल शुक्ला, राष्ट्रीय सहारा प्रतिनिधि कंचौसी सचिन गुप्ता, दैनिक हिन्दुस्तान प्रतिनिधि कंचौसी धर्मेंद्र यादव, CY न्यूज जिला संवाददाता जनपद/जिला औरैया उत्तर प्रदेश भारत विपिन गुप्ता, दैनिक स्वतंत्र चेतना प्रतिनिधि कंचौसी दीपक पांडेय, राष्ट्रीय जजमेंट प्रतिनिधि कंचौसी अभिषेक चक्रवर्ती आदि समेत प्रदेश के कई जनपदों/जिलों एवं जनपद/जिला औरैया के साथ-साथ अनेक पत्रकारों ने उच्च न्यायालय के निर्णय का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा है कि जिस तरह न्यायालय में वकील को बहस करने से नहीं रोका जा सकता है। उसी तरीके से पत्रकारों को भी खबरों को लिखने से रोका नहीं जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय लोकतंत्र को मजबूत करने का स्तंभ है।

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