किसानों की आय दोगुनी करने की योजना के तहत प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की गई। योजना के तहत काफी कम प्रीमियम जमा कराने पर किसानों को अपनी विभिन्न कारणों से बर्बाद हुई फसल की क्षतिपूर्ति की जाती है। लेकिन जनपद में वर्तमान में इस योजना का लाभ पाने के लिए कोई भी किसान पात्र नहीं है। कृषि विभाग के अधिकारी दम तोड़ रही योजना के लिए तमाम कारण गिना रहे हैं। जबकि योजना का लाभ पाने को किसान बीमा लागत का सिर्फ दो फीसदी रकम चुकाता है और बाकी रकम केंद्र और राज्य सरकार देती है।केंद्र सरकार ने पिछले साल योजना को स्वैच्छिक कर दिया था। दरअसल, किसानों की शिकायत थी कि फसल का नुकसान होने पर बीमा कंपनियां सुनवाई नहीं करती हैं और किसानों के साथ ठगी करती हैं। किसानों को बीमा कराने के बाद भी योजना का लाभ नहीं मिल पाता है।
ऐसे मिलता है लाभ
फसल की बुआई के 10 दिनों के अंदर फार्म भरना जरूरी है। फसल काटने से लेकर तैयार करने के 14 दिनों के बीच अगर फसल को प्राकृतिक आपदा के कारण नुकसान होता है, तब भी फसल बीमा योजना का लाभ उठा सकते हैं।
उप कृषि निर्देशक ब्रिजेश चंद्र ने कहा: प्रधानमंत्री बीमा योजना को स्वैच्छिक कर दिया है। कई बार किसानों को योजना का लाभ भी नहीं मिल पाता। यहीं कारण है कि जनपद में योजना का लाभ लेने वालों की संख्या लगभग शून्य ही है।

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