मोदीनगर 24 दिसंबर (चमकता युग) गाजियाबाद जनपद में वायु( प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा -21का ईट भटटा, फैक्ट्री वाले नर्सिंग होम के प्रबंधक धड़ल्ले के साथ दुरूउपयोग कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी भी सुविधा शुल्क लेने पीछे नहीं है? जिस कारण क्षेत्र में जिससे नियमावली व शासनादेशों में सहमति में दिये गये शर्तों का पालन कराने में असमर्थ हैं। यहाँ हम आपके संज्ञान में लाना चाहते हैं कि संबंधित अधिकारी सेवक नियमावली 1956 एवं शासनादेश का पालन नहीं करता है। वह अपराधी की श्रेणी में आता है और संबंधित अधिकारी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। जबकि उधोगों का संचालन इस प्रकार का हो, जिससे वायु मण्डल की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हो। उधोगों में उचित वृक्षा रोपण होना चाहिए जिससे वातावरण में सुधार हो। ईंट भटटे के चारों ओर धूल इत्यादि की रोकथाम के लिए तीन मीटर ऊँची दीवार होनी चाहिए तथा यथा संभव रिक्त स्थानों पर तेजी से विकसित एवं चौड़ी पत्ती वाले वृक्षों का रोपण किया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड केअधिकारीगण कार्रवाई करते भी हैं, तो वह कागजी बनकर रह जाती है। संबंधित अधिकारीगण अपना उल्लू सीधा कर पतली गली से निकल जाते हैं। यदि संबंधित उच्च अधिकारियों अन्य निष्पक्ष अधिकारियों से जांचहो जाये तो दुध का दुध पानी का पानी हो जाएगा।
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