Tuesday, 14 June 2022

प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करना ही है, आज बढ़ते तापमान का कारण।

औरैया/कंचौसी (संवाददाता विपिन गुप्ता) 13 जून (CY न्यूज) प्रकृति को विज्ञान भी मानता है। और इसकी शक्ति को जानता है। कहते हैं कि प्रकृति ही भगवान है। और संसार की व्यवस्थाएं सब कुछ इसी पर निर्भर है लेकिन इतना सब कुछ जानते हुए भी मनुष्य प्रकृति नियमों को दर किनार कर अपना उल्लू सीधा करने के लिए ईश्वर द्वारा रचित प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहा है। आज इसी का परिणाम है कि मनुष्य को विवश होकर 48 से 49 सेंटी ग्रेट तक के तापमान में घुट घुट कर रहना पड़ रहा है।कहते हैं। वृक्ष, पौधे, वनस्पतियां आदि हमारे पर्यावरण को स्वच्छ और सुंदर बनाते है। और हमें शुद्ध आक्सीजन भी प्रदान करते है। अब समझिए कि एक पेड़ को काटने में दो से तीन घंटे लगते हैं। जबकि एक पौधे को लगाकर उसे वृक्ष का आकार तक पहुंचने में दस से बीस साल लग जाते हैं। बस इसी भूल के कारण पर्यावरण का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है। मनुष्य की भूल के कारण ही पशु पक्षियों की कई प्रजातियां नष्ट होती जा रहीं है। अभी भी समय है कि मनुष्य इस सुंदर पर्यावरण के साथ खिलवाड़ न करें। हरे भरे पेड़ों को काटना बंद करे और अधिक से अधिक पौधे लगाए ताकि प्रकृति के इस बिगड़े हुए संतुलन को लाया जा सके।इसके लिए सामाजिक संस्थाओं बुद्ध जीवियों को आगे आना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए व्रक्षारोपण में इन सामाजिक संगठनों के साथ साथ सरकार का भी सहयोग करना चाहिए।

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