मेरठ 17 जून (चमकता युग)।श्रीकृष्ण और अर्जुन के जरिए हम गुरु-शिष्य परंपरा को समझ सकते हैं। गुरु अपने शिष्य की छिपी प्रतिभा को बाहर निकालने में मदद करता है। सुभारती लॉ कॉलेज में मेन्टॉर-मेन्टी सेशन में यह बात प्राचार्य एवं डीन डॉ.वैभव गोयल भारतीय ने कही। सेशन विवि की संस्थापिका एवं डॉ.मुक्ति भटनागर को समर्पित रहा। रीना विश्नोई ने गुरु-शिष्य परंपरा की जरूरत पर बल दिया। प्रोवीसी डॉ.विजय बाधवान कहा कि गुरु को सलाहकार, प्रतिपालक, उपदेषक और परामर्शदाता भी कहा जा सकता है। गुरु अपने शिष्य को कामयाब बनाने में मदद करता है। डॉ.वैभव गोयल ने कहा कि प्राचीन काल से ही गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा रही है। डॉ.मनोज कुमार त्रिपाठी, डॉ.सारिका त्यागी, डॉ.सरताज अहमद, आफरीन आलमास, विकास त्यागी, शालिनी गोयल, डॉ.प्रेमचन्द मौजूद रहे।
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